Sunday, 19 April 2015

ग्रीष्म में बढनेवाली गर्मी, रुक्षता व दुर्बलता को दूर करने के लिए कुछ सरल व अनुभूत प्रयोग :



ग्रीष्म ऋतु विशेष

(ग्रीष्म ऋतु : २० अप्रैल से २० जून तक)
ग्रीष्म में बढनेवाली गर्मी, रुक्षता व दुर्बलता को दूर करने के लिए कुछ सरल व अनुभूत प्रयोग :
(१) गर्मीशामक शरबत : जीरा, सौंफ, धनिया, काली द्राक्ष अथवा किशमिश व मिश्री समभाग लेके कूटकर मिला रखें । एक चम्मच मिश्रण एक ग्लास ठंडे पानी में भिगो दें । २ घंटे बाद हाथ से मसलकर, छानकर पीयें । पीते ही शीतलता, स्फूर्ति व ताजगी आयेगी ।
(ऋषि प्रसाद : अप्रैल २०१०)
(३) गर्मी से होनेवाली तकलीफों में दोपहर को चार बजे एक चम्मच गुलकंद धीरे-धीरे चूसकर खाने से भी लाभ होता है ।
(ऋषि प्रसाद : अप्रैल २०१०)
(४) लू से बचने हेतु : * गुड (पुराना गुड मिले तो उत्तम) पानी में भिगोकर रखें । एक-दो घंटे बाद छानकर पीयें । इससे लू से रक्षा होती है ।
* प्याज और पुदीना मिलाकर बनायी हुई चटनी भी लू से रक्षा करती है ।
(ऋषि प्रसाद : अप्रैल २०१०)
(५) ग्रीष्म में शक्तिवर्धक : ठंडे पानी में जौ अथवा चने का सत्तू, मिश्री व घी मिलाकर पीयें । सम्पूर्ण ग्रीष्म में शक्ति बनी रहेगी ।
(ऋषि प्रसाद : अप्रैल २०१०) (६) मुँह के छाले व आँखों की जलन में : * एक चम्मच (लगभग ५ ग्राम) त्रिफला चूर्ण सुबह मिट्टी के बर्तन में पानी में भिगो दें, शाम को छानकर पीयें । शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, सुबह पी लें । इसी पानी से आँखें धोयें । छाले व जलन कुछ ही समय में गायब हो जायेंगे ।
(ऋषि प्रसाद : अप्रैल २०१०)

No comments:

Post a Comment