Sunday, 19 April 2015

कुछ और जानकारी प्रज्ञा दीदी की । अधूरी हसरतों का दूसरा नाम है प्रज्ञा।



कुछ और जानकारी प्रज्ञा दीदी की ।

अधूरी हसरतों का दूसरा नाम है प्रज्ञा।
उसकी जिंदगी के हर पन्ने में एक कहानी
छुपी हुई है। मध्यप्रदेश के भिंड जिले के
लहार कस्बे के गल्ला मंडी रोड पर
आयुर्वेदिक क्लिनिक चलाने वाले वैद्य
पिता चंद्रपाल सिंह और मां सरला देवी
की बेटी है प्रज्ञा। उनका जन्म तो
मध्यप्रदेश के दतिया जिले में हुआ पर
लालन-पालन लहार में। चार बेटियों और
एक बेटे में दूसरे नंबर की प्रज्ञा में बचपन से
ही लड़कों जैसी चपलता थी। जूड़ो- कराटे
में महारत हासिल करके वह बिगडै़ल लड़कों
की पिटाई तक कर दिया करती थी।
लड़कियों की बजाय उसे लड़कों जैसे कपड़े-
जींस और कमीज पहनना पसंद था। कॉलेज के
दिनों से ही वह मोटर साइकिल पर घूमने
की शौकीन थी। पल्सर और बुलैट जैसी
भारी गाडियां भी प्रज्ञा आसानी से
चला लेती थी। पढ़ाई में औसत विद्यार्थी
थी। लहार से इंटरमीडिएट परीक्षा पास
की और भिंड कॉलेज से इतिहास में स्नातक
भी किया।सिलसिला चलता रहाकॉलेज के
दिनों में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी
परिषद से जुड़ गई। नब्बे के दशक के आखिर
तक वह विद्यार्थी परिषद में रही।
वाक्पटुता और हाजिरजवाबी के चलते
काफी मशहूर हुई और भोपाल, देवास,
जबलपुर, इंदौर में अपने भाषणों से छा गई।
ऐसा माना जाता है कि 1998 के
विधानसभा चुनाव से पहले भिंड जिले की
मेहगांव सीट से चुनाव लड़ने की भी उसने
कोशिशें कीं। गुजरात चुनाव के दौरान भी
उसे चुनावी सभाओं में देखा गया। सन्
2002 में उसने 'जय वंदेमातरम' और
'राष्ट्रीय जागरण मंच' बनाया। । सन् 2004 में उसके पिता लहार
छोड़कर सूरत में बस गए। बन गई संन्यासिन
जनवरी 2007 में जूना अखाड़ा के
पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद के समक्ष
संन्यास लेकर साध्वी पूर्ण चेतनानंद गिरि
बन गई और प्रवचन करने लगी। सूरत को
अपनी कार्यस्थली के रूप में स्थापित करने
के बाद वहां अपना आश्रम बना लिया।
उनके परिजन अभी सूरत में ही रह रहे हैं।
उसके पिता चंद्रपाल सिंह का कहना है,
'मुझे 99 फीसदी विश्वास है कि प्रज्ञा
का मालेगांव बम मुझे विस्फोट में कोई हाथ
नहीं है। पर एक फीसदी अविश्वास
इसलिए है क्योंकि साध्वी बनने के बाद वह
पिछले दो साल से घर नहीं लौटी। अब वह
मुझे पिताजी नहीं डॉक्टर साहब कहकर
पुकारती है। सबकी तरह मैं भी चाहता हूं
कि सच्चाई जल्द से जल्द सबके सामने आए।'

No comments:

Post a Comment