Sunday, 19 April 2015

शिवसेना mp संजय राउत ने सामना पत्रिका में अपना वक्तव्य क्या दिया



शिवसेना mp संजय राउत ने सामना पत्रिका में अपना वक्तव्य क्या दिया की मुसलमानों का मताधिकार समाप्त कर देना चहिये तमाम सेकुलर जमात, मुसलिम संगठन और
‪#‎प्रेस्या‬ वाले होहल्ला मचाने लगे |
यह उस दिन कहाँ थे जिस दिन बसपा नेता.शाफिकुर्रह्मन बंदेमातरम के समय लोक सभा से उठ कर चला गया था | क्या उसका विरोध किसी सेकुलरवादी नेता ने किया ? अथवा आज जो मुसलिम सगठन के कुछ आलिमों ने भी संजय राउत का विरोध किया है | क्या उनहों ने शाफिकुर्रह्मन का विरोध किया, या सदन से निकलने से रोका ? अथवा उसके बाद भी किसी ने उसकी भर्थना की ?
यह काम किसी ने भी नही की –किन्तु आज दोहाई दे रहे हैं मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी साहब, और दारुल उलूम के वक्फ बोर्ड के वरिष्ट उस्ताद ने भी कहा केन्द्र सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए | मोदी सरकार को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए यह हिन्दुस्थान सेकुलर मुल्क है, और यहाँ हर हिंदुस्थानी को बरा बर का हक़ हासिल है |
सभी मौलाना पहले ये बताऎ की यहाँ हर एक को बराबरी का हक़ है इस में कोई संदेह नही पर यह तो बताएं की बंदेमातरम का विरोध करने का हक सिर्फ आपलोगों को किस लिए है ? जब यहाँ रहने का हक़ सब हिंदुस्थानी को है तो आप लोग अगर हिंदुस्थानी होते अथवा कहलाते फिर बन्देमातरम का विरोध किस लिए करते ? क्या दूसरा कोई हिंदुस्थानी इस काम को करता है ?
जब आप लोग हिन्दुस्थान को अपना नही मानते हमारे संविधान को नही मानते तो वोट डालने का हक किस लिए हों आप लोगों का ? संजय राउत ने क्या गलत कहा ? जब आप रहते भारत में ही हैं और भारतीय संविधान को नही मानेंगे तो कौनसा अधिकार है वोट डालनेका ? अभी हामिद अन्सारी उप राष्ट्र पति ने पिछले 26जनवरी को भारतीय ध्वज की सलामी नही दी, क्या यह हमारा संविधान का अपमान नही था ? जब पिछले साल किया था तो अबकी बार न करना क्या दर्शाता है ? अगर भारतीय बनकर रहते तो कौन मना करसकता था भला | आज संविधान याद आ रहा है, बन्देमातरम् का विरोध करते समय याद नही आता अरे शर्म करो शर्म | मुसलिमलीग, इत्तेहादुल मुस्लेमीन, यह सब क्या है ? भारतीय संविधान के अनुरूप हैं क्या ? काम गलत कर भी सीनाजोरी इस्लाम की वृत्ति है मक्कारी इसे ही तो कहते हैं, जो आप लोगों को विरासत में ही मिला है | फिर बिना मक्कारी के कैसे रह सकते आप इस्लाम वाले ? अगर हिंदुस्थानी होते तो अरब वाला नाम ढोते, और न अरबी में अज़ान लगाते, और न अरबी में नमाज़ पढ़ते ? क्या यही सब भारतीय होने की पहचान है ? मरने के बाद भी वही अरबी जुबान में ही आप लोगों से सवाल जवाब किया और माँगा जायगा | क्या मौलाना यह गलत है, पर मौलाना साहब यह तो बताएं की अगर आप लोग भारतीय हैं तो अरब में अरबी जुबान वाली नमाज को आप लोग भारतीय होकर किसलिए लादे फिर रहे हैं ? भारत का कौन सा तेहवार आप इस्लाम वाले मनाते हैं, जो अपने को भारतीय बता रहे हैं ? जब चाँद देख कर सारा काम करते हैं फिर भारतीयता को कहाँ अपनाया है आप लोगों ने ? सरासर संविधान का मजाक उड़ाकर भी दोहाई दे रहे, यह दोगली नीति कब तक चलेगी और कब तक भारत के लोग सहन करते रहेंगे ?
अत: संजय राउत ने जो कहा बिलकुल सत्य कहा और सम्पूर्ण भारत के निवासी भी यही कहेंगे इस में कोई शक नही |

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